छात्र जीवन की रोचक कहानी

नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के यमुना हॉस्टल में एक रोचक घटना घटी थी। 


इस कहानी के मुख्य पात्र थे दो छात्र - डॉ. राजाराम और नवल किशोर। ये दोनों ही हॉस्टल के प्रमुख हास्यजनक और अद्वितीय छात्र थे।


एक दिन, यमुना हॉस्टल के सभी छात्र अपने कमरों में सो रहे थे, जब डॉ. राजाराम और नवल किशोर के मन में एक बड़ा प्रैंक ख़्याल आया। वे दोनों बेहद ही शरारती और मनोरंजनप्रिय छात्र थे, और उन्हें अपने दोस्तों को हंसी में डूबने का आनंद था।


रात के आधे बजे, डॉ. राजाराम और नवल किशोर ने तय किया कि वे हॉस्टल के कुछ कमरों में फुसकर छिपकर उनके दोस्तों को डरा देंगे। वे जानकारी हासिल करने के बाद, डॉ. राजाराम और नवल किशोर ने धीरे-धीरे कमरों में घुसकर एक अद्भुत प्रैंक खेलने की तैयारी की।


आधी रात को, जब सभी को गहरी नींद में डूबे हुए थे, डॉ. राजाराम और नवल किशोर ने बिना आवाज़ के हँसने का प्रयास किया। वे बिल्कुल छिपे हुए थे और उनके पास बड़ी सी आँखों वाले मास्क थे, जिन्हें पहन कर वे भूत की भंतियाँ बनने का प्रयास कर रहे थे।


जैसे ही उनके दोस्त नींद में से जागे और अचानक वे रूम के अंदर आए, डॉ. राजाराम और नवल किशोर ने बड़ी चुपचापी से अपनी आँखों वाले मास्क पहनकर उन्हें डराने का प्रयास किया।


दोस्तों का प्रतिक्रियात्मक चिल्लाहट और डर के चीखने से पूरा हॉस्टल हलचल में आ गया। उनकी इस हरकत से सभी छात्र ने खुशी और मजाक में लिपटकर एक साथ हँसी में डूब जाने का आनंद उठाया।


यह प्रैंक न केवल हॉस्टल में अच्छे ख़ासे हँसी-मजाक का बाजार बन गया, बल्कि डॉ. राजाराम और नवल किशोर के दोस्तों के बीच एक यादगार और चिड़चिड़े पल बन गया।


इसके बाद से, यमुना हॉस्टल के छात्र डॉ. राजाराम और नवल किशोर के हास्यजनक प्रैंक्स की चर्चा करने लगे और वे हॉस्टल के हंसी-मजाक के माहौल को और भी रंगीन बनाने लगे। इस तरह, यमुना हॉस्टल की कहानी छात्रों के दिलों में एक खास स्थान पाई और उसकी यादें सदैव यादगार रही।


कैसी लगी कहानी 😅

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