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डॉक्टर वर्षा सिंह ने (BHU) वाराणसी से कृषि विज्ञान में डॉक्टरेट (PhD) डिग्री प्राप्त की

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डॉक्टर वर्षा सिंह ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) वाराणसी से कृषि विज्ञान में डॉक्टरेट (PhD) डिग्री प्राप्त की है। वह पूर्व छात्रा है नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय अयोध्या की। Varsha Singh with Advisor  "छात्र जीवन के संघर्ष को दर्शाते हुए डॉक्टर वर्षा सिंह की कहानी" विश्वविद्यालय शिक्षा का मार्ग अगर एक चुनौतियों भरा सफर है, तो डॉक्टर वर्षा सिंह ने इस चुनौतीभरे सफर को पार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी छात्र जीवन की कहानी एक मनोबल और संघर्षपूर्ण कहानी है जो हमें प्रेरित करती है। वर्षा सिंह ने अपने छात्र जीवन के समय अनेक संघर्षों का सामना किया है, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का संकल्प बनाए रखा। उन्होंने न केवल अपने अध्ययन में प्रशस्ति प्राप्त की, बल्कि उन्होंने अपने आत्मविश्वास को भी मजबूती से बनाए रखा। विश्वविद्यालय के पढ़ाई के दिनों में उन्होंने अनेक बाधाओं का सामना किया, जैसे कि विभिन्न विषयों की कठिनाइयों, परीक्षाओं की तनावपूर्णता, और आध्यात्मिक रूप से मजबूत रहने की चुनौतियों का सामना किया। उनका मनोबल कभी नहीं टूटा और ...

नरेंद्र सिंह, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बनने तक का सफर

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 डॉ नरेंद्र सिंह की कहानी, जिन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि, अयोध्या में संघर्षपूर्ण छात्र जीवन से लेकर वर्तमान में बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बनने तक का सफर, वाकई प्रेरणास्त्रोत है।  डॉ नरेंद्र सिंह पहले बैच के छात्रों में से थे और उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सफलता पाने के लिए अपना दृढ़ संकल्प कभी नहीं हारने दिया। वित्तीय संकटों और शैक्षिक कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, नरेंद्र सिंह की पढ़ाई में निष्ठा और कृषि में उनकी रुचि उन्हें अलग कर देती है। उन्होंने अपने सपनों में विश्वास किया और उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक कठिनाइयों को पार करने के लिए मेहनत करने को तैयार रहा। अपने शैक्षिक सफर के दौरान, नरेंद्र सिंह ने निरंतर ज्ञान की प्यास और मज़बूत मेहनत की प्रदर्शन की। उनकी सहनशीलता और संकटों को पार करने की क्षमता ने आखिरकार उनके शिक्षकों और मेंटरों की ध्यान आकर्षित की, जिन्होंने उनकी संभावनाओं को माना। नरेंद्र सिंह की मेहनत और समर्पण ने उन्हें उनके रोल को परिचयित कराया जब उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के निद...

परिश्रम की यात्रा: संजय द्विवेदी का पथ देवरिया से नई दिल्ली तक और DRDO के निदेशक बनना

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परिश्रम की यात्रा: संजय द्विवेदी का पथ देवरिया से नई दिल्ली तक और DRDO के निदेशक बनना Dr Sanjai Kumar Dwivedi देवरिया के शोरमगर्जन शहर में, एक युवा लड़के का जन्म हुआ था, जिसका नाम संजय द्विवेदी था। उनके मन में खुले आसमान की तरह विशाल सपने थे। वो एक आम घराने में पले थे, और मेहनत और संघर्ष की तकद से अच्छे से परिचित थे। उनकी कहानी, जो देवरिया की धूली-मिली सड़कों से लेकर नई दिल्ली के शक्ति-भरी गलियों तक पहुँचती है, उनकी अड़ूँअडूँ स्वभाव और निरंतर ज्ञान प्राप्त करने की अविचल इच्छा का परिचयक है। संजय के प्रारंभिक वर्ष जिज्ञासा और शिक्षा के प्रति भावना से भरे थे। उन्होंने स्थानीय स्कूल में उत्साहपूर्वक पढ़ाई की, हमेशा नई बातों का पता लगाने और अपने दृष्टिकोण को बढ़ाने के इच्छुक रहे। जैसे-जैसे उनकी पढ़ाई बढ़ी, यह साफ हो गया कि उनकी रुचि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हो रही थी। अपने परिवार और शिक्षकों के समर्थन के साथ, उन्होंने उन दिनों की ओर कदम बढ़ाया जब नए अनुभवों और खोजों की प्रतीक्षा होती थी। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, संजय की यात्रा ने उन्हें आयोध्या के नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय म...

डॉ. आश्विनी दत्त पाठक और डॉ. पी.एल. सरोज की प्रेरणादायक कहानी:

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डॉ. आश्विनी दत्त पाठक और डॉ. पी.एल. सरोज की प्रेरणादायक कहानी: एक समय की बात है, नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या में, एक छात्र जीवन की संघर्षपूर्ण कहानी शुरू होती है जिसमें डॉ. आश्विनी दत्त पाठक और डॉ. पी.एल. सरोज अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की मेहनत, संघर्ष और प्रेरणादायक यात्रा ने उन्हें ICAR (Indian Council of Agricultural Research) के निदेशक बनने तक पहुंचाया। डॉ. आश्विनी दत्त पाठक एक छोटे से गांव से थे और उनकी पाठशाला में शिक्षा शुरू होती थी। उन्होंने हमेशा अपने उच्च लक्ष्य को पूरा करने का सपना देखा था, और वे कृषि विज्ञान में अपनी पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति उन्हें चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर कर दी। वे परिश्रम के साथ-साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहे और अपने लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाते रहे। दूसरी ओर, डॉ. पी.एल. सरोज भी एक सामान्य परिवार से थे और उनकी माता-पिता की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने शिक्षा के सपनों को बहुत मेहनत से पूरा करने का निर्णय लिया। उन्हो...

झाकर जी उत्कृष्ट सेवा के लिए उप निदेशक कृषि द्वारा सम्मानित

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झाकर जी उत्कृष्ट सेवा के लिए  उप निदेशक कृषि द्वारा सम्मानित विभाग में झाकर जी द्वारा किये गए उत्कृष्ठ कार्यो के लिए आज उप निदेशक कृषि द्वारा प्रसस्ती पत्र प्रदान किया गया "झाकर जी का समर्पण और प्रतिबद्धता हमारे संगठन के उन्नति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके नेतृत्व में हमारे कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का सफल संचालन किया गया है और हम सभी उनके समर्थन में हैं।" झाकर जी, जिन्होंने अपने प्रतिबद्ध कामकाज और अद्वितीय प्रतिबंधक क्षमता के साथ उच्चतम मानकों को पूरा करने में निरंतर योगदान किया है, ने इस सम्मान को स्वीकार किया। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों में और भी महत्वपूर्ण योगदान करने की प्रतिज्ञा की और संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संकल्पबद्धता दिखाई। यह सम्मान झाकर जी की मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट सेवाओं को मान्यता देने का एक सशक्त प्रमाण है और हम सभी कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता है कि हम भी अपने काम में उच्चतम मानकों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहें। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्र है और गंगा छात्रावास के...

पंत विवि की डा. रूचिरा को ’राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मान’

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पंत विवि की डा. रूचिरा को ’राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मान’ देश-विदेश के मौनपालकों को गोमूत्र तकनीक से लाभ पहुँचाने के लिए सम्मानित जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय की कीट वैज्ञानिक डा. रूचिरा तिवारी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मान-2017 से सम्मानित किया गया है। डा. रूचिरा को यह सम्मान 27 दिसंबर को नई दिल्ली में पोषण एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान संघ की राष्ट्रीय अध्यक्षा डा. निकी डबास एवं दिल्ली मेडिकल काऊंसिल सचिव डा. गिरीश त्यागी द्वारा प्राकृतिक मधुमक्खी पालन में देश-विदेश के मौनपालकों को गोमूत्र आधारित मधुमक्खीपालन तकनीक से लाभ पहुँचाने के लिए ’आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट अवार्ड फॉर नेचुरल बी कीपिंग’ प्रदान किया गया है। डा. रूचिरा ने पूरे विश्व में मधुमक्खीपालन के क्षेत्र में पहली बार गोमूत्र आधारित जैव तकनीक बनाई, और देश-विदेश के कई मौनपालकों के साथ जुडकर मौनपालन में क्रांति ला दी। उन्हें यह सम्मान गोमूत्र आधारित तकनीक अपनाकर लाभ कमाने वाले मौनपालकों एवं आंध्र प्रदेश के प्रगतिशील मौनपालक जगदीश रेड्डी की फीडबैक के आधार पर दिया गया, जो जैविक कृषि से लाभ उठा रहे हैं। राष्ट्रीय सम्मान समार...